अपर चेस्ट को मजबूत बनाने के लिए करें इंक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट | Incline Bench Press Workout Benefits in Hindi
सोमवार को चेस्ट डे होता है। इसके दिन आम तौर पर हम चेस्ट की कसरत करते हैं। इतना वर्कआउट करने पर भी हमें अपने मन मुताबिक रिजल्ट नहीं मिल पाता है।
कहीं नहीं कहीं, हम उचित वर्कआउट नहीं कर रहे हैं या हमें सही दिशा में मार्गदर्शन नहीं मिल रहा हैं। यदि आप बेहतर तरीके से इनक्लाइन बेंच प्रेस की वर्कआउट करते हैं तो आपको बिल्कुल परिणाम मिलेगा। तब जाकर आपको शानदार रिजल्ट मिलेगा।
आज इस ब्लॉग पर हम इनक्लाइंड बेंच प्रेस वर्कआउट के फायदे बारे में चर्चा करेंगे।
इंक्लाइन बारबेल बेंच प्रेस और इंक्लाइन डम्बल बेंच प्रेस वर्कआउट में क्या अंतर होता है?
जब हम इंक्लाइंड बेंच प्रेस वर्कआउट बारबेल के साथ करते हैं तो उसको इंक्लाइंड बारबेल बेंच प्रेस कहते हैं।और जब हम इंक्लाइंड बीच प्रेस वर्कआउट डंबल के साथ करते हैं तो तब उसे इंक्लाइंड डंबल बेंच प्रेस कहते हैं।
इनक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट के फायदे एक जैसे हैं आप चाहे तो बारबेल से करें या डम्बल से।
दोनों वर्कआउट में केवल इतना अंतर है कि एक वर्कआउट में बारबेल का इस्तेमाल करते हैं और दूसरे वर्कआउट में डंबल का इस्तेमाल करते हैं।
इंक्लाइंड बारबेल बेंच प्रेस वर्कआउट को करते समय बारबेल की मदद से आप वजन को संतुलित कर सकते हैं लेकिन जब आप इंक्लाइंड डंबल बेंच प्रेस वर्कआउट करते हैं तो आप वजन को संतुलित नहीं कर पाते हैं।
डम्बल का साइज छोटा होता है बैलेंस करने में दिक्कत आती है।
इनक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट क्या होता है?
इनक्लाइंड बेंच प्रेस वर्कआउट के फायदे बहुत है जैसा की यह एक कंपाउंड वर्कआउट है। जिस में चेस्ट के साथ-साथ ट्राइप्स और शोल्डर का भी इन्वॉल्वमेंट रहता है।यह चेस्ट की सबसे अच्छा वर्कआउट में से एक वर्कआउट है।
इस वर्कआउट में चेस्ट के साथ-साथ शोल्डर और ट्राइसेप्स की एक्सरसाइज हो जाती है।
इनक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट कितने प्रकार के होते हैं?
इनक्लाइंड बेंच प्रेस वर्कआउट के फायदे बहुत है जैसा की यह एक कंपाउंड वर्कआउट है। जिस में चेस्ट के साथ-साथ ट्राइप्स और शोल्डर का भी इन्वॉल्वमेंट रहता है।यह चेस्ट की सबसे अच्छा वर्कआउट में से एक वर्कआउट है।
इस वर्कआउट में चेस्ट के साथ-साथ शोल्डर और ट्राइसेप्स की एक्सरसाइज हो जाती है।
इनक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट बहुत प्रकार के होते हैं। इसमे से कुछ जो इस प्रकार है।
- Incline Barbell Bench Press
- Incline Dumbbell Bench Press
- Close-Grip Inclined Barbell Bench Press
- Wide-Grip Inclined Barbell Bench Press
इनक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट कैसे करते हैं?
इनक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट बहुत प्रकार के होते हैं। इसमे से कुछ जो इस प्रकार है।
- Incline Barbell Bench Press
- Incline Dumbbell Bench Press
- Close-Grip Inclined Barbell Bench Press
- Wide-Grip Inclined Barbell Bench Press
इनक्लाइन बेंच प्रेस करने के लिए पहले बारबेल या डंबल ले लो जो आप इस्तेमाल करना चाहते हैं इसके बाद ऊपर पिक्चर में दिए गए 45 डिग्री के पोजीशन में बेंच पर लेट जाएं।
अपने दोनों हाथों से बारबेल या डंबल को पकड़ ले और फिर धीरे-धीरे ऊपर की ओर पुश करें और उसी मोशन में नीचे की ओर ले आएं।इसे बार-बार दोहराएं।
यदि आप बिगिनर्स हैं तो 10-12 रेप्स लगायें और यदि आप अनुभवी हैं तो इससे अधिक रेप्स लगायें।
इनक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट क्या फायदा होता है?
इनक्लाइन बेंच प्रेस करने के फायदे काफी है।इनक्लाइन बेंच प्रेस आपके बॉडी के चेस्ट के ऊपर वाले हिस्से को टारगेट करता है।
इनक्लाइन बेंच की ऐसी बनावट होती है कि जब हम वर्कआउट करते समय हम इनक्लाइन बेंच पर लेटते हैं तो तब हमारे चेस्ट के ऊपरी हिस्से में मांसपेशियों में तनाव पैदा होता है। जिस से हमारी मांसपेशियां बढ़ती हैं।
इनक्लाइन बेंच प्रेस करते समय मुख्य रूप से ऊपरी चेस्ट को टारगेट किया जाता है लेकिन इसके साथ-साथ सेकेंडरी तौर पर शोल्डर और ट्राइप्स भी टारगेट होती है।
इनक्लाइन बेंच प्रेस वर्कआउट करने के दौरान नुकसान क्या होते हैं?
इनक्लाइन बेंच प्रेस का समय सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसमे पोस्चर का बहुत बड़ा रोल होता है।अगर आपने सही तारिके से वर्कआउट किया तो आपका रिजल्ट भी वैसा मिलेगा।
इनक्लाइन बेंच प्रेस में हमें ध्यान रखना है कि जब भी हम वजन को बेंच पर रख कर लिफ्ट करते हैं तब, हमें वजन को अच्छे से बैलेंस करके लिफ्ट करना है अगर थोड़ा भी बैलेंस खराब हुआ तो बहुत ज्यादा चोट लग सकती है।इस वर्कआउट में पॉश्चर बहुत मायने रखता है।
इनक्लाइन बेंच प्रेस का समय सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसमे पोस्चर का बहुत बड़ा रोल होता है।अगर आपने सही तारिके से वर्कआउट किया तो आपका रिजल्ट भी वैसा मिलेगा।
इनक्लाइन बेंच प्रेस में हमें ध्यान रखना है कि जब भी हम वजन को बेंच पर रख कर लिफ्ट करते हैं तब, हमें वजन को अच्छे से बैलेंस करके लिफ्ट करना है अगर थोड़ा भी बैलेंस खराब हुआ तो बहुत ज्यादा चोट लग सकती है।
इस वर्कआउट में पॉश्चर बहुत मायने रखता है।
Conclusion(निष्कर्ष ) -
चेस्ट को चौड़ा और मजबूत बनाने के लिए इनक्लाइंड बेंच प्रेस वर्कआउट सबसे अच्छा है।
इनक्लाइंड बेंच प्रेस एक कंपाउंड वर्कआउट है। जो चेस्ट के साथ-साथ ट्राइसेप्स और शोल्डर टारगेट करता है। कंपाउंड वर्कआउट वह होता है जो एक वर्कआउट करते समय में एक से अधिक बॉडी पार्ट को टारगेट करता है।
इस ब्लॉग में आखिरी तक बने रहने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। अगर आपके मन में कुछ भी सवाल है तो कृपया मुझे मेल करें और टिप्पणी करें।
मुझे आशा है कि मैंने आपको अपने ब्लॉग से कुछ आपके जीवन में वैल्यू प्रदान किया होगा।
धन्यवाद।
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